जालंधर: शहर में बाल भिक्षा की समस्या के खात्मे के लिए डिप्टी कमिश्नर डा.हिमांशु अग्रवाल ने बाल भिक्षा को रोकने और इसमें शामिल बच्चों के पुनर्वास के लिए संवेदनशील और ठोस प्रयास करने पर जोर दिया।
यहां जिला प्रशासकीय परिसर में प्रोजैक्ट जीवनजोत 2.0 की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि बाल भिक्षा केवल कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि सामाजिक और मानवीय दृष्टि से भी गंभीर चुनौती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस समस्या के समाधान के लिए बाल भिक्षा में शामिल व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई करने के साथ-साथ बाल भिक्षा में शामिल बच्चों की पहचान कर उनकी सुरक्षा, उचित देखभाल, काउंसलिंग और पढ़ाई के लिए ठोस उपाय सुनिश्चित किए जाएं, ताकि उन्हें अच्छा भविष्य दिया जा सके।
डा.अग्रवाल ने ऐसे बच्चों के माता-पिता के पुनर्वास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता को कौशल प्रशिक्षण आदि उपलब्ध करवाया जाए, ताकि उनके लिए रोजगार का रास्ता साफ हो सके और वह अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकें तथा बच्चों को भिक्षा मांगने की ओर धकेलने की मजबूरी खत्म हो सके।
उन्होंने इलाका अनुसार चेकिंग अभियान चलाने और इसे लगातार जारी रखने के निर्देश दिए, ताकि शहर को बाल भिक्षा से पूरी तरह मुक्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि बाल भिक्षा को रोकने संबंधी अभियान में एन.जी.ओ. को शामिल किया जाए, जो इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने संदिग्ध मामलों में डी.एन.ए. टेस्ट करवाने का निर्देश भी दिया, ताकि बच्चों की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उल्लेखनीय है कि बाल भिक्षा को रोकने के लिए जिले में नवंबर और दिसंबर 2025 तथा 15 जनवरी 2026 तक चलाए गए छापेमारी अभियान के दौरान 36 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है।
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 की धारा 76 के अनुसार बच्चों को भिक्षा में उपयोग करने वालों को सख्त सजा हो सकती है। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति द्वारा बच्चे को भिक्षा में उपयोग करने पर 5 साल तक की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा बच्चे को भिक्षा में उपयोग के लिए उसके अंग काटे जाते है तो उस व्यक्ति को 7 से 10 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।
डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि बाल भिक्षा रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता बहुत जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को इस संबंध में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य प्रमुख स्थानों पर जागरूकता फ्लेक्स और बैनर लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने अपील की कि बाल भिक्षा में फंसे बच्चे या उनके माता-पिता मदद के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क कर सकते है या व्हाट्सएप नंबर 9646222555 पर मैसेज भेजा जा सकता है। उन्होंने यह भी अपील की कि यदि किसी को बाल भिक्षा या किसी भी मुसीबत में फंसे बच्चे के बारे में जानकारी मिलती है, तो वह भी इन नंबरों पर सूचना दे सकता है।
उन्होंने पुलिस विभाग को बाल भिक्षा रोकू टास्क फोर्स को छापेमारी के दौरान और रेस्क्यू किए गए बच्चों को आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने उपरांत अपने संबंधित राज्यों में भेजने के मौके पर आवश्यक पुलिस सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश भी दिए।
इस मौके पर जिला प्रोग्राम अधिकारी मनजिंदर सिंह, जिला बाल सुरक्षा अधिकारी अजय भारती, डा.राकेश चोपड़ा आदि भी मौजूद थे।
