सिरसाः गुरुद्वारा जीवन नगर में वर्तमान नामधारी मुखी श्री ठाकुर दलीप सिंघ जी के मार्गदर्शन में नामधारी सिखों द्वारा होला मोहल्ला का त्रिवेणी संगम बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। आज होला मोहल्ला के अंतिम दिन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी भी यहां पहुंचे और साध संगत के दर्शन किए तथा गुरु माता गुरमीत कौर जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। ठाकुर दलीप सिंघ जी की अगुवाई में आयोजित इस धार्मिक समागम के दौरान मुख्यमंत्री ने विनम्रता के साथ लंगर और गौशाला में सेवा कर सेवा और सिमरन की महान परंपरा को नमन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सैनी जी ने कहा कि केवल हरियाणा और पंजाब को ही नहीं, समूचे राष्ट्र को नामधारी पथ पर गर्व है तथा सरकार की तरफ से नामधारी पंथ को धार्मिक और सामाजिक रूप से सहयोग देने का वादा किया । उन्होंने कहा कि उन्हें जीवन नगर की पवित्र धरती पर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने सतिगुरू दलीप सिंघ जी के चरणों में नमन किया।
गुरुद्वारा समिति के प्रधान जसपाल सिंघ जी ने बताया कि नामधारी सिखों को एक स्थान पर बसाने के लिए सतिगुरू प्रताप सिंघ जी ने 1946 में कई हजार एकड़ भूमि खरीदी थी। इस में से गुरुद्वारा जीवन नगर के आसपास लगभग 130 एकड़ भूमि में से केवल 65 एकड़ जमीन ही गुरुद्वारे के पास है, जहां सतिगुरू जी के आदेशानुसार लंगर, वर्णी, गौशाला और औषधालय आदि सुचारू रूप से चलाए जा रहे हैं।
समागम में स्वामी राजेश्वरा नंद जी महाराज, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के अध्यक्ष और गौ रक्षक मोहम्मद फैज खान जी, आरएसएस राष्ट्रीय मंच से विक्रमादित्य जी, पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल जी, एडवोकेट यतींद्र सिंघ जी और राज्यसभा सदस्य रामचंद्र जी जांगड़ा विशेष रूप से पहुंचे और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके अलावा श्रीमती रैणु शर्मा जी, सुरिंदर आर्य जी, देव कुमार शर्मा जी, जगदीश चोपड़ा जी, शीशपाल कंबोज जी, अमीर चंद मेहता जी, गुरदेव सिंघ राही जी और हनुमान कुंडू जी ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
श्री ठाकुर दलीप सिंघ जी की प्रेरणा से 269 पाठों के भोग अमृतधारी सित्रयो द्वारा डाले गए। दूर-दूर से हजारों की संख्या में संगत ने समागम में भाग लिया। इस अवसर पर राजनीतिक और धार्मिक हस्तियों के अलावा संत सर्वप्रीत सिंघ जी (डॉक्टर), मास्टर सुखदेव सिंघ जी, पलविंदर सिंघ जी, तजिंदर सिंघ जी, मोहन सिंघ झब्बर जी, सूबा भगत सिंघ जी, कुलविंदर सिंघ जी, मुख्तियार सिंघ जी, सुखराज सिंघ जी, दलजीत कौर जी, सुखप्रीत कौर जी, संदीप कौर जी, गुरवंत कौर जी, भगवंत कौर जी आदि तथा विशाल संगत उपस्थित रही।
